मुरली सार :- ''मीठे बच्चे - कोई भी कर्म, विकर्म न बने इसकी पूरी सम्भाल करनी है, कदम-कदम पर बाप की श्रीमत लेकर कर्म में आना है''
प्रश्न: विकर्मो से कौन बच सकते हैं? बाप की सहायता किन्हें मिलती है?
उत्तर: जो बाप से सदा सच्चे रहते, प्रतिज्ञा कर विकारों का दान देकर वापिस लेने का संकल्प नहीं करते, वह विकर्मो से बच जाते हैं। बाप की सहायता उन्हें मिलती जो कर्म, विकर्मबनने के पहले राय लेते हैं। साकार को अपना सच्चा-सच्चा समाचार बताते हैं। बाबा कहते बच्चे, सर्जन के आगे कभी अपनी बीमारी छिपाना नहीं। पापों को छिपायेंगे तो वृद्धि होतीरहेगी, पद भी भ्रष्ट हो जायेगा, सजायें भी खानी पड़ेंगी। गीत:- बचपन के दिन भुला न देना...








